कब है Chhat Puja 2025 Date: पुरे दुनिया को पता हे भारत एक विविधताओं का देश है, जहाँ हर पर्व और त्योहार अपने अंदर एक गहरा आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करता हे । हर हिंदू पर्ब सनातन धर्म का एक अत्यंत पवित्र और लोगो के आस्था से जुड़ा होता हे । इन्हीं में से एक सबसे पवित्र और लोक आस्था से जुड़ा पर्व है छठ पूजा।यह पर्व खास कर प्रत्येक साल कार्तिक महीना शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि (छठी तिथि) को आता है, यानी दीपावली के छठे दिन। यह पर्व मुख्य रूप से बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश, नेपाल के तराई क्षेत्र और बंगाल के कुछ हिस्सों में अत्यधिक श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। बाकि धीरे-धीरे यह पर्व अब पूरे भारत ही नहीं बल्कि विदेशों में बसे भारतीयों द्वारा भी पूरे उत्साह से मनाया जाने लगा है।
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Chhat Puja 2025 Date:
छठ पूजा खास कर भगबान सूर्य देव की आराधना का पर्व है। सूर्य देव को जीवन का आधार और ऊर्जा का स्रोत माना जाता हे । हिंदू धर्म में सूर्य को एकमात्र प्रत्यक्ष देवता कहा गया है। जिन्हें हम अपनी आँखों से देख सकते हैं। छठ पर्व में सूर्य देव और उनकी बहन छठी मैया (उषा देवी) की पूजा की जाती है। छट पूजा 2025 मैं 25 October 2025 से सुरु होकर 28 october 2025 में समाप्त होगा।
| दिन | तारीख |
| पहला दिन | 25 अक्टूबर 2025 |
| दूसरा दिन | 26 अक्टूबर 2025 |
| तीसरा दिन | 27 अक्टूबर 2025 |
| चौथा दिन | 28 अक्टूबर 2025 |
छठ पूजा का बिशेषता:
छठी मैया को संतान और परिवार की रक्षा करने वाली देवी माना जाता है। यह पर्व प्रकृति, जल, अग्नि, वायु और सूर्य के प्रति आभार प्रकट करने का प्रतीक है। ये पर्ब कुछ पौराणिक कथा को जोड़ा गया हे , जिनमें से सबसे प्रसिद्ध कथा रामायण और महाभारत से आता हे।
कहा जाता है जब अयोध्या का राजा की भगवान श्रीराम और माता सीता ने अयोध्या लौटने के बाद जब श्रीराम के राज्याभिषेक किया जा रहा था , तब माता सीता ने कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को सूर्य देव की पूजा की थी और उस दिन उन्होंने उपवास रखकर सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित किया था। तभी से इस पर्व की परंपरा चली आ रही है।
और दूसरा पौराणिक कथा महाभारत से जोड़ा जाता हे। द्वापर योग में भी कुंती पुत्र कर्ण, जो सूर्य देव के पुत्र थे, प्रतिदिन सूर्य को जल अर्पित करते थे। यही कारण है कि छठ पूजा को कर्ण की उपासना से जुड़ा पर्व भी कहा जाता है।
छठ पूजा की पूजन विधि:
छठ पूजा ( Chhat Puja 2025 Date ) खास तौर पर चार दिनों तक चलता हे। ये एक अत्यंत रीती निति से भरा पबित्र से भरा पर्व है। इस दौरान जो ब्रत रखने वाला हर ब्यक्ति शुद्ध आचरण रखते हैं,अपने मन, तन और घर को भी पूरी तरह पवित्र बनाते हैं। जानिए बिस्तार रूप से कैसा पालन किया जाता हे ४ दिन मानाने बाला छठ पूजा।
पहला दिन – नहाय खाय
पहले दिन व्रती प्रातः स्नान करते हैं और घर की साफ-सफाई करते हैं। इस दिन ब्रती रखने वाला ब्यक्ति दिन में एक बार भजन करते हे, जो पूरी तरह शुद्ध निरामिष और स्वातिक भोजन होता हे। आमतौर पर चने की दाल, कद्दू की सब्जी और चावल भोजन में परस्ते हे । इस दिन को शुद्धता की शुरुआत माना जाता है।
दूसरा दिन – खरना
दूसरे दिन को खरना कहा जाता है। इस दिन व्रती पूरे दिन बिना जल लिए (निर्जला ) उपवास करते हैं और सूर्यास्त के बाद सूर्य देव को अर्घ्य देने के प्रसाद ग्रहण करते हैं। प्रसाद में गुड़ से बनी खीर, रोटी और केला प्रमुख परसा जाता हे । खरना का प्रसाद पूरे परिवार के साथ साथ आस पास पड़ोस में बाँटा जाता है, जिससे सामूहिक सौहार्द का भाव पैदा होता है। और पड़ोस के बीच एक अच्छा बुझामना रहती हे।
तीसरा दिन – संध्या अर्घ्य
तीसरे दिन व्रती पूरे दिन निर्जला उपवास रखते हैं और शाम को सूर्यास्त के समय जलाशय या नदी किनारे जाकर सूर्य देव को अर्घ्य देते हैं।
इस अवसर पर महिलाएँ पारंपरिक वस्त्र पहनती हैं, सिर पर डाला में प्रसाद रखकर जल में खड़ी होती हैं। और इस बीच एक सांस्कृतिक नाच, संगीत और भजन कीर्तन में वातावरण पूरी तरह से आध्यात्मिक हो उठता है। प्रसाद में, नारियल, केला, गन्ना, सिंघाड़ा और मौसमी फल रखे जाते हैं।
चौथा दिन – उषा अर्घ्य
छठ पूजा के चौथा या अंतिम दिन सुबह उगते ही सूर्य को अर्घ्य दे कर प्राथन करते हे । यह छठ पूजा का सबसे महत्वपूर्ण क्षण होता है क्योंकि इस दिन सूर्य की प्रथम किरणों आगमन के साथ व्रती अपने व्रत को पूरा करता हे । सूर्य को जल अर्पित करने के बाद वे परिवार और समाज की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। इसके बाद प्रसाद बाँटा जाता है और चार दिन का कठोर उपवास समाप्त होता है।
समापन:
छठ पूजा भारतीय इतिहास और संस्कृति का एक अद्भुत पर्ब हे जिसमें भक्ति, अनुशासन, और लोक परंपरा एक साथ जुड़ी हुई हैं। आने वाला पीढ़ी को मोटीवेट करता हे अपने संस्कृति के साथ जुड़े रहने के लिए। यह पर्व हमें यह संदेश देता है कि जब हम प्रकृति के साथ तालमेल बिठाते हैं
,तो जीवन में संतुलन, समृद्धि और सुख अपने आप आने लगते हैं। सूर्य देव की आराधना के माध्यम से हम अपनी आत्मा को शुद्ध करते हैं और जीवन में नई ऊर्जा का संचार करते हैं। ये एक पर्ब नहीं बल्कि मानब समाज के लिए एक प्रतिक हे। यह हमें सिखाती है कि जल, वायु, अग्नि और सूर्य जैसे तत्वों का सम्मान करना ही जीवन की सबसे बड़ी पूजा है।
साल 2025 में छठ पूजा 25 अक्टूबर से शुरू होकर 28 अक्टूबर 2025 में समाप्त होगा।
अब 2025 में नहाय खाय छठ पूजा 25 अक्टूबर 2025 यानी पहला दिन पर पालन होगा।
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